श्रीराम की शरण में विभीषण, हनुमान के पराक्रम से लक्ष्मण को मिला जीवनदान

फोटो नहवाई गांव में रामलीला का मंचन करते कलाकार

महेवा कला और नहवाई की रामलीला में धर्म, भक्ति, समर्पण और वीरता का जीवंत चित्रण; अंगद-रावण संवाद से लेकर संजीवनी बूटी लाने तक के प्रसंगों ने बांधा समां

मानस न्यूज-24 | संवाददाता

मांडा, प्रयागराज। यमुनापार के गांवों में रामलीला की प्राचीन परंपरा आज भी लोगों को भगवान श्रीराम के आदर्शों, भक्ति और धर्म के मार्ग से जोड़ रही है। इसी क्रम में रविवार की रात महेवा कला और नहवाई गांव में आयोजित रामलीला में विभीषण शरणागति, अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से जहां प्रभु श्रीराम की करुणा और शरणागत के प्रति उनके प्रेम को प्रस्तुत किया, वहीं हनुमानजी के अदम्य साहस और भक्ति का ऐसा दृश्य साकार किया कि दर्शक भावविभोर हो उठे।

रावण ने विभीषण को किया निष्कासित, श्रीराम ने दिया आश्रय

रामलीला के दौरान लंका में विभीषण ने अपने भाई रावण को समझाते हुए युद्ध का रास्ता छोड़ने और माता सीता को सम्मानपूर्वक प्रभु श्रीराम के पास लौटाने की सलाह दी। विभीषण की बात सुनकर रावण क्रोधित हो गया। अहंकार में डूबे दशानन ने अपने भाई की सद्बुद्धि को स्वीकार करने के बजाय उसे चरण प्रहार कर लंका से निष्कासित कर दिया।

इसके बाद विभीषण प्रभु श्रीराम की शरण में पहुंचे। श्रीराम ने उनकी निष्ठा और समर्पण को स्वीकार करते हुए उन्हें आश्रय दिया और लंका का राजा बनाने की घोषणा की। इस प्रसंग ने दर्शकों को संदेश दिया कि भगवान की शरण में आने वाले व्यक्ति के लिए सदैव स्थान है। व्यक्ति की पहचान उसके कुल या अतीत से नहीं, बल्कि उसके विचारों, आचरण और सत्य के प्रति समर्पण से होती है।

महेवा कला में रामलीला का मंचन करते कलाकार

अंगद ने दिया शांति का संदेश, रावण ने ठुकराया प्रस्ताव

लंका पर चढ़ाई से पहले प्रभु श्रीराम ने युद्ध टालने और माता सीता की सकुशल वापसी के उद्देश्य से युवराज अंगद को शांति दूत बनाकर रावण के दरबार में भेजा। अंगद ने रावण को समझाने का प्रयास किया कि वह प्रभु श्रीराम से वैर छोड़कर माता सीता को वापस कर दे और विनाशकारी युद्ध से बच जाए।

लेकिन रावण ने अंगद के शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया। अहंकार के कारण वह किसी की सलाह मानने को तैयार नहीं हुआ और उसने युद्ध का रास्ता चुन लिया। अंगद-रावण संवाद के दौरान कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय और संवाद अदायगी ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इस प्रसंग के माध्यम से यह संदेश सामने आया कि अहंकार में डूबा व्यक्ति हितकारी सलाह को भी अनसुना कर देता है और अंततः अपने विनाश का कारण बनता है।



मेघनाद के ब्रह्मास्त्र से मूर्छित हुए लक्ष्मण

इसके बाद राम-रावण युद्ध का दृश्य प्रस्तुत किया गया। घनघोर युद्ध के दौरान मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया। लक्ष्मण को अचेत देखकर रामदल में शोक छा गया। प्रभु श्रीराम सहित सभी वानर योद्धा चिंतित हो उठे। इस दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया।

विभीषण की सलाह पर लंका से सुषेण वैद्य को बुलाया गया। वैद्य ने लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए प्रातःकाल से पहले संजीवनी बूटी लाने की आवश्यकता बताई। समय कम था और लक्ष्मण के जीवन की रक्षा करना आवश्यक था। ऐसे कठिन समय में पवनपुत्र हनुमान संजीवनी बूटी लाने के लिए द्रोणागिरी पर्वत की ओर रवाना हुए।

कालनेमि का वध कर संजीवनी लेकर लौटे हनुमान

संजीवनी लाने के मार्ग में हनुमानजी का सामना कालनेमि से हुआ। हनुमानजी ने कालनेमि का वध कर अपनी यात्रा जारी रखी। इसी दौरान उनकी भरत से भेंट हुई। सभी बाधाओं को पार करते हुए हनुमान संजीवनी बूटी लेकर रामदल पहुंचे। संजीवनी के प्रयोग से लक्ष्मण की मूर्छा दूर हुई और उनके प्राण बच गए।

लक्ष्मण के स्वस्थ होने पर रामदल में प्रसन्नता लौट आई। रामलीला पंडाल जय हनुमान और जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। हनुमानजी के इस प्रसंग ने दर्शकों को सेवा, समर्पण, साहस और संकट के समय कर्तव्य निभाने की प्रेरणा दी। कलाकारों ने पूरी लीला को जीवंत बनाकर दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की।

महेवा कला में इन कलाकारों ने निभाए प्रमुख पात्र

महेवा कला गांव की रामलीला में विभिन्न पात्रों का अभिनय करने वाले कलाकारों ने अपने संवाद और भाव-भंगिमाओं से दर्शकों को प्रभावित किया। प्रभु श्रीराम की भूमिका सुंदरम पांडेय, लक्ष्मण की करन, हनुमान की देवी प्रसाद वैश्य, जामवंत की मानस मिश्रा, रावण की अश्वनी श्रीवास्तव और मेघनाद की भूमिका अविनाश शर्मा ने निभाई। कलाकारों के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा।

नहवाई की रामलीला में भी दिखा कलाकारों का कौशल

नहवाई गांव में भी रविवार रात रामलीला के इन्हीं प्रमुख प्रसंगों का मंचन किया गया। यहां प्रभु श्रीराम की भूमिका ओम, लक्ष्मण की आयुष, मेघनाद की बृजेश, हनुमान की विष्णुशंकर द्विवेदी और सुषेण वैद्य की भूमिका राजकुमार ने निभाई। कलाकारों ने अपने अभिनय से रामकथा के प्रसंगों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिसकी दर्शकों ने प्रशंसा की।

दोनों गांवों की रामलीला में प्रस्तुत प्रसंगों ने यह संदेश दिया कि सत्य और धर्म का मार्ग कठिन जरूर हो सकता है, लेकिन अंततः विजय उसी की होती है। विभीषण की शरणागति, अंगद का शांति प्रयास और हनुमानजी का पराक्रम रामकथा के ऐसे प्रसंग हैं, जो आज भी समाज को सदाचार, विवेक, विनम्रता और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देते हैं।

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